पूर्व ऐतिहासिक काल (Pre-Historical Period) की विस्तृत जानकारी।

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पूर्व ऐतिहासिक काल

पूर्व ऐतिहासिक काल
पूर्व ऐतिहासिक काल

पूर्व ऐतिहासिक काल से अभिप्राय उस काल से है, जब मनुष्य ने पृथ्वी पर जन्म लिया था। इस काल में मनुष्य ने घटनाओं का कोई लिखित विवरण नहीं रखा। इस काल में विषय में जो भी जानकारी मिलती है वह पाषाण के उपकरणों, मिट्टी के बर्तनों, खिलौने आदि से प्राप्त होती है। पूर्व ऐतिहासिक काल को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है। 1. पुरा पाषाण काल। 2. मध्य पाषाण काल 3. नव पाषाण काल।

 

मानव और उसकी सभ्यता का उदय तथा विकास निसंदेह एक बहुत ही रोचक कहानी है। आदिमानव की यह कहानी पृथ्वी पर उसके जन्म के साथ शुरू हुई‌‌। मानव का जन्म कब और कहां हुआ इस संबंध में वैज्ञानिकों में मतभेद है‌। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी पृथ्वी लगभग 400 करोड़ वर्ष पुरानी है, पर मानव का इस पृथ्वी पर जन्म 26 लाख वर्ष पहले प्लाइस्टोसीन युग में अमेरिका में हुआ।

 

उसका जीवन बहुत कुछ पशुओं से मिलता-जुलता था। वह कंदमूल तथा पशुओं का शिकार करके उनका कच्चा मांस खाता था। वह अपने शरीर को ढकने के लिए जानवरों की खाल पहनता था। वह खेती करना और घर बनाना नहीं जानता था। वह अपने जीवन की रक्षा के लिए पर्वतों की गुफाओं में शरण लेता था। वह पत्थरों के औजार बनाता था। यह औजार देखने में बहुत ही भद्दे होते थे। मध्य पाषाण काल में भी उसका जीवन लगभग उसी प्रकार का था।

पूर्व ऐतिहासिक काल
पूर्व ऐतिहासिक काल

नवपाषाण काल में मानव के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। नवपाषाणकाल में मानव ने खानाबदोश जीवन त्याग कर स्थाई तौर पर बसना शुरू कर दिया था। उसने कृषि तथा पशुपालन के व्यवसाय को अपना लिया था। अग्नि तथा पहिए के आविष्कारों ने उसके जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में सहायता की। मानव ने ऊनी वस्त्र पहनना शुरू कर दिए थे। वह अब अपने भोजन को पकाकर खाने लगा था‌।

 

उसके द्वारा बनाए गए औजार पहले से भी अच्छे और सुंदर थे‌। उसके द्वारा बनाए गए इस काल में मिट्टी के बर्तन भी बहुत आकर्षक थे। उसके धार्मिक विश्वास अब स्पष्ट हो चले थे। वह कला में दिलचस्पी लेने लगा था। इस प्रकार आदि मानव अपनी सूझबूझ के द्वारा अंधकार से निकलकर सभ्यता के प्रकाश की ओर धीरे-धीरे अग्रसर हुआ।



 

पुरापाषाण काल

 

पुरापाषाण काल का आरंभ आज से लगभग 26 लाख वर्ष पूर्व माना जाता है। इस युग के अफ्रीका, एशिया तथा यूरोप में पत्थर के कई भद्दे औजार मिले हैं। जो स्पष्ट: मानव की उपस्थिति का संकेत देते हैं। भारत की पुरापाषाण काल की सभ्यता का विकास प्लाइस्टोसीन युग अथवा हिम युग में हुआ। भारतीय पुरापाषाण काल के प्रसिद्ध केंद्र पंजाब की सोहन नदी घाटी, उत्तर प्रदेश की बेलन घाटी, आंध्र प्रदेश में करनूल, बिहार में सिंहभूम, मध्य प्रदेश में भोपाल, गुजरात में साबरमती तथा महाराष्ट्र में नेवासा आदि थे।

 

पुरापाषाण काल की मुख्य विशेषताएं।

 

1. औजार:- पुरापाषाण काल का मानव नितांत बर्बर था। वह जंगली पशुओं के समान जीवन व्यतीत करता था। उसने जंगली पशुओं से अपनी रक्षा के लिए तथा छोटे छोटे पशुओं को मार कर उनका मांस खाने के लिए इस युग में कुछ औजार बना लिए थे। यह सभी औजार क्वार्टजाइट नामक एक विशेष पत्थर से बने होते थे। यह पत्थर बहुत कठोर होता था। इन औजारों में कुल्हाड़ी, गंडासे, भाले, चाकू तथा कुछ छीलने काटने और खोदने वाले औजार सम्मिलित हैं। यह सभी औजार देखने में बहुत गंदे और भद्दे लगते थे ।

 

2. निवास स्थान:- पुरापाषाण काल का मानव घर बनाना नहीं जानता था। अतः वर्षा सर्दी तथा धूप से अपना बचाव करने के लिए वह गुफाओं में निवास करता था। वह वृक्षों के नीचे भी निवास करता था। कभी-कभी वह नदियों झीलों के कगारों में भी शरण लेता था।

पूर्व ऐतिहासिक काल
पूर्व ऐतिहासिक काल

3. भोजन:- पुरापाषाण काल में मानव पशु पालन व कृषि से अनजान था। इसलिए वह अपनी जीविका की लिए प्रकृति से प्राप्त होने वाले कंदमूल तथा फलों पर निर्भर था। वह छोटे छोटे पशु तथा पक्षियों को मार कर उनका मांस भी खाता था। इनके अतिरिक्त वह मछली का भी सेवन करता था। इस काल में मनुष्य को आग की जानकारी नहीं थी, अतः उस समय मानव कच्चा भोजन खाता था।

 

4. पहनावा:- आरंभ में मानव नग्न अवस्था में रहता था। बाद में मानव ने गर्मी तथा ठंड से बचने के लिए वृक्षों की छाल, पत्तों तथा पशु पशुओं की खाल से अपने शरीर को ढकना शुरू कर दिया था। इस युग में स्त्री तथा पुरुष दोनों ने आभूषण पहनने शुरू कर दिए थे। यह आभूषण पत्थर तथा जानवरों की हड्डियों से निर्मित किए जाते थे।

 

5. जीवन:- पुरापाषाण काल में मानव स्थिर जीवन व्यतीत नहीं करता था। वह भोजन की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह घूमता रहता था। जंगली जानवरों से रक्षा के लिए उसने छोटे-छोटे समूहों में रहना शुरू कर दिया था।

 

6. कला:- पुरापाषाण काल में मानव को कला के साथ बहुत प्यार था। उसने गुफाओं की दीवारों पर पशु पक्षियों के चित्र बनाने शुरू कर दिए थे। यह चित्र देखने में यद्यपि इतने सुंदर नहीं थे। परंतु इसे कला के विकास की ओर मानव का पहला कदम माना जाता है।

पूर्व ऐतिहासिक काल कला
पूर्व ऐतिहासिक काल कला

7. धार्मिक विश्वास:- पुरापाषाण काल के मानव के धार्मिक विश्वासों के बारे में इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ इतिहासकारों का विचार है कि उस समय मानव के हृदय में किसी प्रकार की धार्मिक भावना का उदय नहीं हुआ था। दूसरी ओर कुछ इतिहासकारों का विचार है कि उस समय के लोग भी शव को दफनाते समय उनके साथ औजार आदि भी रख देते थे। इससे स्पष्ट है कि उनका मृत्यु के पश्चात जीवन में विश्वास था।

 

मध्य पाषाण काल

लगभग 9000 ईसा पूर्व में हिम युग के अंत के साथ ही भारत में पुरापाषाण काल का भी अंत हो गया। इसके बाद मध्य पाषाण काल का आरंभ हुआ। इस काल में मानव सभ्यता के विकास की ओर एक कदम आगे बढ़ा। इस काल की संस्कृति मोटे तौर पर 9000 ईसा पूर्व से 4000 ईसा पूर्व तक बनी रही। मध्य पाषाण काल में जलवायु पुरापाषाण काल की जलवायु की अपेक्षा अधिक गर्म और शुष्क हो गई थी। अतः लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना अधिक सुगम हो गया था।



 

मध्य पाषाण काल की विशेषताएं।

 

1. औजार:- मध्य पाषाण काल में मनुष्य ने अपनी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के पत्थरों के औजार बना लिए थे। इनमें से अधिकतर औजार तेजधारी थे, जो संभवत काटने तथा खुरचने के लिए प्रयोग किए जाते होंगे। अनेक छेद करने वाले नुकीले औजार भी मिले हैं। इनके अतिरिक्त मध्य पाषाण काल में त्रिभुजकार एवं चतुर्भुजकार औजार भी थे। यह सभी औजार बहुत ही छोटे आकार के थे। इसलिए इन्हें लघु औजार के नाम से जाना जाता था। यह औजार भारत के लगभग सभी भागों से प्राप्त हुए हैं।

 

2. निवास स्थान:- मध्य पाषाण काल के लोग भी खानाबदोश जीवन व्यतीत करते थे। अब वे गुफाओं के अतिरिक्त पहाड़ों के समतल भागो तथा नदियों के किनारे पर अपनी झोपड़िया डालकर रहने लग गए थे। यह झोपड़िया घास फूस से निर्मित होती थी। वह सदैव झुण्डों में रहते थे।

Pre History Period
Pre History Period

3. भोजन:- मध्य पाषाण काल के लोग पशुओं का शिकार करके उनका मांस खाते थे। वह गाय, भैंस, घोड़ा, बैल, भेड़ तथा बकरी आदि का शिकार करते थे। वे मछली भी खाते थे। आग की जानकारी न होने के कारण वो कच्चा मांस खाते थे। इसके अतिरिक्त वे कंदमूल तथा जंगली फलों का भी प्रयोग करते थे।

 

4. पहनावा:- मध्य पाषाण काल के लोग पशुओं की खालो तथा वृक्षों के छालों से अपने शरीर को ढांपते थे। स्त्री और पुरुष दोनों ही आभूषण के शौकीन थे। यह आभूषण पत्थरों और जानवरों की हड्डियों से बने होते थे।

 

5. धार्मिक विश्वास:- मध्य पाषाण काल के मानव ने शव को विधि पूर्वक दफनाना शुरू कर दिया था। वह जादू टोनो का सहारा लेने लगे थे।

Pre History Period
Pre History Period

नवपाषाण काल

नवपाषाण काल में मानवीय जीवन में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। इसी कारण यह कहा जाता है कि इस काल में मानव ने सभ्यता के द्वार पर पांव रखें। संसार के अन्य भागों में नवपाषाण काल का आरंभ लगभग 9000 ईसा पूर्व में हो चुका था परंतु भारत में इसका आरंभ 7000 ईसा पूर्व में हुआ ।भारत में यह संस्कृति 2500 ईसा पूर्व तक बनी रही।



 

नवपाषाण काल की मुख्य विशेषताएं

 

1. औजार:- नवपाषाण काल के औजारों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। यह औजार मध्य पाषाण काल के औजारों की अपेक्षा अधिक सुंदर और प्रभावशाली थे। इस काल में निर्मित किए गए औजारों के लिए बढ़िया किस्म के पत्थरों का प्रयोग किया जाने लगा। यह सभी औजार पॉलिशदार होते थे। इस काल में बनी पत्थर की कुल्हाड़ियां तथा फलक भारत के अनेक भागों से प्राप्त हुए हैं। कुल्हाड़ी से लोग अनेक प्रकार के काम लेते थे।

नवपाषाण काल
नवपाषाण काल

कई स्थानों से पत्थर के हथौड़े, तेजधार चाकू तथा कई प्रकार के औजार प्राप्त हुए हैं। इस काल में मनुष्य ने लकड़ी और हड्डियों के भी अनेक औजार बनाए थे। हड्डियों से निर्मित औजार प्रचुर मात्रा में कश्मीर तथा बिहार नामक स्थानों से प्राप्त हुए हैं।

 

2. निवास स्थान:- नवपाषाण काल की एक सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इस काल में मनुष्य ने खानाबदोश जीवन का त्याग कर दिया था तथा वह स्थाई रूप से घरों में रहने लगा था। कृषि का व्यवसाय अपनाने के कारण उसके लिए स्थाई रूप से रहना आवश्यक हो गया था। उसने पत्थर, मिट्टी, कच्ची ईंटों आदि की झोपड़िया बना ली थी। इसी प्रकार परिवार तथा कबीलों का जन्म हुआ। धीरे-धीरे बस्तियां स्थापित हो गई तथा इन्होंने गांव का रूप धारण कर लिया।

नवपाषाण काल
नवपाषाण काल

3. भोजन:- नवपाषाण काल में मनुष्य ने कृषि का व्यवसाय शुरू कर दिया था। अतः अब वह गेहूं, जौ, चावल, मक्खी आदि कई प्रकार के अनाजों का प्रयोग करने लगा था। पशु पालन के कारण वह दूध का भी प्रयोग करने लगा था। इसके अतिरिक्त उसने मास एवं जंगली फलों को खाना भी जारी रखा। आग की जानकारी हो जाने के कारण अब वह भोजन को पकाकर खाने लगा।

 

4. पहनावा:- नवपाषाण काल में मनुष्य ने शरीर को ढकने के लिए वस्त्रों का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। यह वस्त्र सूती और ऊन के बने होते थे। इस काल में भी पुरुषों और स्त्रियों ने पहले की तरह पत्थरों और हड्डियों के आभूषणों का प्रयोग जारी रखा।

 

5. कृषि:- नवपाषाण काल में मनुष्य ने कृषि करना शुरू कर दिया था। निसंदेह यह इस काल के मानव की एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। आरंभ में उसने पत्थर के कुदालों और खोदने के डंडों से कृषि योग्य भूमि तैयार की। बाद में उसने हलों का प्रयोग शुरू कर दिया था। इससे कृषि करना सुगम हो गया था। इस काल में मनुष्य गेहूं, मक्की, चावल, कपास आदि की खेती करने लगा था। कृषि की जानकारी हो जाने के कारण मनुष्य को अब भोजन की तलाश में भटकने की जरूरत नहीं थी। इसलिए अब उसने स्थाई तौर पर बसना शुरू कर दिया था।



 

6. पशु पालन:- नवपाषाण काल से पूर्व मानव मांस प्राप्त करने के लिए पशुओं का शिकार करता था तथा उन्हें अपना सबसे खतरनाक दुश्मन समझता था। धीरे धीरे उसे यह अनुभव हुआ कि कुछ पशु उपयोगी है तथा जिन्हें पाला जा सकता है। अतः पाषाण काल में उसने कुत्ता, गाय, बैल, घोडा, भेड़ तथा बकरी आदि पशु को पालना शुरू कर दिया।

Dog
Dog

कुत्ता शायद पहला जानवर था जिसे मनुष्य ने शिकार में सहायता देने के लिए पाला। पशुओं को न केवल दूध, मांस प्राप्त करने के लिए पाला जाता था अपितु उनसे खेती तथा यातायात का कार्य भी लिया जाने लगा।

 

7. अग्नि का आविष्कार:- अग्नि का आविष्कार नवपाषाण काल की एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। मानव ने दो पत्थरों को रगड़ कर अग्नि का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। अग्नि की सहायता से उसने भोजन को पकाकर खाना शुरू कर दिया था। अग्नि का उपयोग करके उसने प्रकाश के लिए अपने आप को ठंड से बचाने, जंगली पशुओं को डराने, मिट्टी के बर्तन पकाने तथा बढ़िया औजार बनाने के लिए भी किया। वास्तव में अग्नि के आविष्कार ने मानव जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में बहुत सहायता की।

अग्नि का आविष्कार
अग्नि का आविष्कार

8. पहिए का आविष्कार:- नवपाषाण काल में हुए पहिए के आविष्कार के कारण मानव के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। पहिए का प्रयोग सबसे पहले चाक के रूप में बर्तन बनाने के लिए किया गया। इससे पहले कुमार मिट्टी के बर्तन हाथ से बनाता था। अब पहिए की सहायता से पहले की अपेक्षा कहीं अधिक अच्छे और तीव्रता से बर्तन बनाए जाने लगे। पहिए के कारण अब कपास को काटना बहुत सरल हो गया। पहिए के कारण अब शीघ्रता से तथा बड़ी मात्रा में वस्त्र तैयार करना संभव हो गया।

पहिए का आविष्कार
पहिए का आविष्कार

पहिए का उपयोग गाड़ी खींचने के लिए भी किए जाने लगा। इस कारण मनुष्य तथा सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना सुगम हो गया। मिट्टी के बर्तन आरंभ में मानव ने मिट्टी के बर्तन हाथ से बनाने शुरू किए। नवपाषाण काल में वह उन बर्तनों को आग में पकाने लगा। इस काल में कुम्हार चाक की सहायता से अत्यंत सुंदर और सुडौल बर्तन बनाने लगा। वह बर्तनों पर चित्रकारी भी करने लगा था। यह चित्र पशु पक्षियों और मनुष्य के होते थे।

 

10. कला:- नवपाषाण काल में कला का विकास शुरू हो गया था। इसी काल में मन मानव ने पशु पक्षियों के अलावा मनुष्य के चित्र भी बनाने शुरू कर दिए थे। यह चित्र पुरापाषाण काल की तुलना में बहुत सुंदर थे। इस काल में मानव ने पक्की ईंटों की मूर्तियां बनानी शुरू कर दी थी। इसके अतिरिक्त उसने अपने मनोरंजन के लिए बांसुरी तथा ढोलक आदि बना लिए थे। इस प्रकार इस काल में संगीत कला का विकास भी शुरू हुआ।

पूर्व ऐतिहासिक काल कला
नवपाषाण काल कला

11. धार्मिक विश्वास:- नव पाषाण काल में मनुष्य के धार्मिक विश्वास अधिक स्पष्ट होने लगे। वह सूर्य, चंद्रमा, तारे, वृक्षों तथा पर्वतों आदि प्राकृतिक शक्तियों की उपासना करने लगा। इस काल में शवों विधि के अनुसार दफनाया जाता था तथा कब्रो के ऊपर स्मारक बना दिए जाते थे। इससे स्पष्ट है कि वे अपने पितरों की पूजा करते थे। नवपाषाण काल के लोग मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास रखते थे। इसके अतिरिक्त उस समय के लोग जादू टोना में काफी विश्वास रखते थे। इस काल में लोगों ने अपने देवी-देवताओं को खुश करने के लिए बलि देनी शुरू कर दी थी। पहले नर बलि दी जाती थी लेकिन बाद में पशुओं की बलि भी दी जाने लगी।

 

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